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Nar ho, na nirash karo man ko - Maithilisharan Gupt नर हो, न निराश करो मन को/मैथिलीशरण गुप्त - हिन्दिनी

कुछ काम करो, कुछ काम करो जग में रह कर कुछ नाम करो यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो समझो जिसमें यह व्यर्थ …

Fir Ek Baar Bas Ek Baar फिर एक बार, बस एक बार - महादेवी वर्मा

फिर एक बार   मैं कम्पन हूँ तू करुण राग मैं आँसू हूँ तू है विषाद , मैं मदिरा तू उसका खुमार मैं छा…

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